Khush Rahne Ke Mantr

जब हम खुश रहने के मन्त्र Khush Rahne Ke Mantr का उपयोग करते हैं तब हमारा मन हमारा शरीर और हमारी साँसे एक दूसरे के साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं तब हमको ख़ुशी का एहसास होता है। इस एहसास को नियमित रूप से आप प्राप्त कर सकें ऐसा मेरा प्रयास है। नीचे कमेंट में लिखकर जरूर बताएं क्या आप खुश रहते हैं।

लगातार खुश रहने के लिए ये आवश्यक है की हम संतोष करना सीखें। ख़ुशी के एहसास को प्राप्त करने करने के लिए हमारे पास संतोष होना बहुत आवश्यक है।

आपकी जीवनशैली का आपके उपर गहरा असर होता है। हमको अपनी जीवन शैली का चुनाव करते समय इन बातों का ख्याल रखना चाहिये।

आज ज्यादातर लोगों को रफ्तार पसंद है। सब कुछ चाहिए मिनटों में पर इस भागदौड़ के बीच मन का चैन कहीं गायब है, क्योंकि हम अपने अंतर्मन से तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं।

दूसरों से अपनी तुलना करना मानसिक असंतुलन पैदा कर सकता है। अभी आप रीता जी का ही उदाहरण ले लें रीता जी एक अध्यापिका हैं आज उनकी सैलरी का प्रमोशन हुआ है अब उनको हर महीने पांच हजार रूपये ज्यादा मिलेंगे। बहुत ही खुश दिख रहीं थीं रीता जी उन्होंने अपने सामने स्कूल के चपरासी की ओर देखा और उससे पूंछ लिया भैया आपका वेतन कितना बढ़ा है। चपरासी ने प्रसन्नता से बताया की उसका वेतन एक हजार रूपये बढ़ा है।

रीता जी चपरासी की ओर देख रहीं थीं की एक हजार रूपये का वेतन बढ़ने पर इतना खुश हो रहा है जैसे इसके बहुत पैसे बढ़ गए हैं। रीता जी चपरासी से बोलीं आपको बधाई की आपके वेतन में एक हजार रूपये मासिक की वृद्धि हुई है। चपरासी महोदय बोले मैडम आपको पता है शालिनी जी के छः हजार रूपये महीना बढ़ा है। इतना सुनते ही रीता जी की ख़ुशी गायब हो गयी।

वो भूल गयीं की उनका वेतन पांच हजार रूपये बढ़ा है उनको बस इतना ज्यादा रहा की शालिनी जी के छः हजार रूपये बढे हैं। रीता जी दुःखी मन से अपने घर गयीं हालांकि उनके वेतन में वृद्धि हुई थी लेकिन दूसरों से तुलना करने के चक्कर में रीता जी दुःख की पीड़ा सहन कर रहीं थीं।

जीवन के सारे सुख पाना चाहते हैं, लेकिन शरीर और मन की उपेक्षा करके हमारा यही रवैया हमें तनाव दे रहा है। इससे नींद खराब हो रही है और शारीरिक सेहत प्रभावित हो रही है।

फिर इसका समाधान क्या है?

तो जवाब है ‘योग’ कई शोध में भी यह बात सामने आई है कि जो लोग नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं, उन्होंने अपने जीवन में शारीरिक और मानसिक स्तर पर कई सकारात्मक बदलाव देखे हैं।

मन पर कंट्रोल

छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाना। धैर्य खोना, क्रोध में आकर कुछ भी बोल देना। ये सब मन पर नियंत्रण न होने की वजह से होता है। ये मन ही है, जो सुख और दुख दोनों के लिए जिम्मेदार है।

स्वस्थ मन के बिना स्वस्थ शरीर नहीं हो सकता है। इसलिए नियमित योग अभ्यास द्वारा हमें अपने मन की प्रकृति को समझने और इसे नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए।

क्रोध या मुश्किलों के समय में स्थिर मन किसी भी चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करने में मदद करेगा और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सहनशक्ति और धैर्य भी देगा।

योग के द्वारा हम सभी विचारों को अच्छे विचारों बदलने का प्रयास में करते हैं।

अनुशासन के लिए जरूरी

ऋषि पतंजलि ने योग के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने प्रचार किया कि मानव जीवन स्वास्थ्य पर आधारित है और स्वास्थ्य के बिना जीवन का अस्तित्व नहीं हो सकता।

ऐसा इसलिए कि किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए शरीर सबसे आवश्यक है। लेकिन शरीर के लिए अनुशासन सबसे जरूरी है।

अपने रिश्तों में सुधार करना, स्वस्थ आहारका पालन करना, एक नया शौक सीखना, यहां तक कि अपने क्रोध और भावनाओं को नियंत्रित करना।

अनुशासन के बिना कोई भी सफलता संभव नहीं है और आपको बता दूं कि योग के सभी अभ्यास अनुशासन पर आधारित हैं। ये अभ्यास आपको अधिक जागरूकता लाते हैं

आप अपने मन और शरीर को बेहतर ढंग से समझने लगते हैं। आप अपनी जरूरतों के साथ और अधिक जुड़े हुए हैं। नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से मानसिक अनुशासन .प्राप्त करने में भी मदद मिलती है, जो अंततः किसी की दिनचर्या का एक अभिन्न अंग बन जाता है।

आप अपने काम, आदतों और जीवनशैली में बड़े सकारात्मक बदलाव देखेंगे। आप अपने जीवन और आपके पास जो कुछ भी है उसकी सराहना करना शुरू कर देंगे।

खुश रहना आपकी अपनी जिम्मेदारी है इसलिये ख़ुशी के रास्ते तलाश करें जो आपको भी खुश रखे और आपके माहौल को भी।

ये पोस्ट आपको कैसी लगी मुझे जरूर बताएं। कमेंट जरूर करें शेयर करें आपका बहुत बहुत आभार इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के लिये

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