क्या दो साल के बच्चे को प्री नर्सरी मे भेजना उचित हे?

क्या दो साल के बच्चे को प्री नर्सरी मे भेजना उचित हे?

आजकल हर कोई माता पिता अपने दो साल के बच्चे को किसी न किसी प्री स्कूल या प्ले स्कूल मे भर्ती करने की होड मे लगे हुये है। पर कभी किसी ने ये सोचा है की ये उचित है या नहीं ? कही हम अपने बच्चे के बचपन को खत्म तो नहीं कर रहे है? 

मुझे नहीं पता कि ये स्कूल के प्रति जुनून है या यह सिर्फ हमारे बच्चों को हम से दूर करन  का एक तरीका है?  कभी कभी मै सोचता हु कि क्या स्कूल में प्री-स्कूल  या प्री  नर्सरी भी होनी चाहिए? 

क्या हम सोचते हैं कि हमारे बच्चों को नर्सरी में भेजने से पहले कुछ शांति की जरूरत है और घर पर कुछ अनौपचारिक खेल जो कि बच्चे खेलने के लायक हैं की जरूरत है। 

हमें वास्तव में उन्हें एक ब्रेक देने की जरूरत है। वास्तव में लगता है कि हम बच्चों को नर्सरी भेजने के इस विचार से इतने अधिक प्रभावित हो रहे हैं कि हमने नर्सरी स्कूलों को अपने बच्चों को डंप करने के लिए एक जगह के रूप में देखना शुरू कर दिया है, जब हम अपने शोक पूरे करने जाते हैं जेसे  शॉपिंग करना, सैलून जाना, दोस्तों से मिलना इत्यादि इत्यादि । 

क्या हमने कभी इस बात पर विचार किया है कि हमारे बच्चों को उन नर्सरी स्कूलों में किस तरह का बर्ताव  मिलता है? बर्ताव  की बात तो छोड़िए, क्या नर्सरी स्कूल दो साल के बच्चे को भेजने के लिए सबसे अच्छी जगह है, जो अभी भी डायपर या लंगोट पहने हुए है, 

जरा सोचिए कि एक बाई या आंटी की देखरेख में नर्सरी स्कूल में ये छोटे बच्चे दिन भर क्या करते हैं, माँ के कोमल प्यार और देखभाल से वंचित?  अगर हम दो साल की उम्र में अपने बच्चों को हमसे दूर भेजना शुरू कर दें तो हमें अपने बच्चों के साथ खेलने का समय कब मिलेगा ओर बच्चे  हमसे कितना प्यार कर पाएंगे? 

कुछ लोग कहते हैं कि बच्चे अगर जल्दी स्कूल जाएंगे तो होशियार होंगे लेकिन मुझे नहीं लगता कि दो साल के बच्चे को नर्सरी में भेजने से वह होशियार हो जाएगा। इतनी कम उम्र में हम अपने बच्चों को अजनबियों के हाथों में क्यों रखना चाहेंगे ??

इसके अलावा अधिकांश बच्चे इन तथाकथित नर्सरी स्कूलों से संक्रामक रोगों को घर वापस लाते हैं। यदि किसी को चिकन पॉक्स या फ्लू हो जाता है, तो यह उस कक्षा के सभी बच्चों में फैल जाएगा।

मुझे नहीं पता कि हम आज के माता-पिता के साथ क्या गलत हो रहा है। यदि हम अपने बच्चों को स्कूलों में नहीं भेजते  हैं तो घर मे  हम नौकरानी (नेनी) को उनके जीवन के सभी पहलुओं में उनकी देखभाल करने के लिए छोड़ देते हैं। मैंने देखा है बच्चे जो नौकरानी के करीब हो गए हैं क्योंकि उनके माता-पिता हमेशा दूर रहते हैं और वे हमेशा नौकरानी के साथ रहते हैं। क्या हम चाहते हैं कि नौकरानी अपने बच्चों में अपनी संस्कृति विकसित करे ? ठीक ऐसा ही होगा क्योंकि हम अपने बच्चों को अपने जीवन का बड़ा हिस्सा नौकरानी के साथ बिताने की अनुमति देते हैं। ज्यादातर मामलों में हम यह बहाना देते हैं कि हम इन बच्चों को शालीनता से पालने के लिए पैसे की तलाश कर रहे हैं और उन्हें वह सब कुछ प्रदान करते हैं जो उन्हें लगता है कि वे  चाहते हैं। इसके विपरीत प्यार सबसे बड़ी चीज लगती है जो हमारे बच्चों उस से वंचित रह जाते है।

इसे अज्ञानता कहें, पिछड़ापन कहें या कुछ ओर ? कुछ भी हो लेकिन मेरा मानना ​​है कि हमारी सरकार  को बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी तरह का कानून बनाना चाहिए। उनके साथ छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए; उन्हें तंग नहीं किया जाना चाहिए।  उन्हें स्वतंत्र रूप से खेलने के उनके अधिकार से वंचित नही किया जाना चाहिए। इतनी कम उम्र में बच्चों को दूर भेजने के इस पागलपन को खत्म कर देना चाहिए। हमें अपने समाज में कुछ परिवर्तन  लाना चाहिए।

जब हम बड़े हो रहे थे तो हमारे परिजन कभी भी हमें बच्चों की देखभाल के लिए नर्सरी स्कूलों में नहीं डालते थे, जबकि वे भी कामकाजी थे। कामकाजी माताओं ने काम पर जाने के दौरान उनकी देखभाल के लिए भरोसेमंद नौकरानियों को काम पर रखा था, लेकिन अपने कार्यालयों को छोड़कर वे अपने बच्चों के साथ रहने के लिए हड़बड़ी में रहती थीं ओर जल्दी से जल्दी अपने बच्चो के पास वापस घर लोट कर आती थी। इसके विपरीत आजकल मैंने देखा है कि महिलाएं मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) को भी अस्वीकार कर देती हैं, पैसे की लालच के नाम पर प्रसव के एक या दो सप्ताह बाद कार्यालय वापस आना चाहती हैं। स्तनपान के समय के बारे में बात करें और वे आप पर पाषाण युग से संबंधित होने का आरोप लगाकर हंसने लगेंगी। वे पैसा बनाने के इस विचार से ग्रस्त हैं।

माता-पिता को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और यह महसूस करना चाहिए कि अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने की जरूरत है चाहे वे नर्सरी स्कूल में हों या हाई स्कूल में। माता-पिता का मार्गदर्शन और देखभाल सबसे अच्छी चीज है जो किसी बच्चे के साथ कभी भी हो सकती है, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो। क्या आप सोच सकते हैं कि हम अपने दो साल के बच्चे को प्री नर्सरी या प्ले स्कूल मे भेज कर बच्चे के बचपन के साथ खिलवाड़ कर रहे है? ये हमे अभी नहीं पता चलेगा पर जब बच्चे बड़े हो जाएंगे और हम से दूर हो जाएंगे तब हमे पता चलेगा की हमने कितनी बड़ी भूल कर दी है ? मेरा तो माता-पिता से ये ही निवेदन है कि मेरी इस बात पर गौर करे और अपने दो साल के बच्चे को प्ले स्कूल या प्री नर्सरी मे भेजने से पहले अच्छी तरह से सोच ले। बाकी फेसला आपका है, बच्चा भी आपका है! 

अच्छी पालन-पोषण की शुभ कामनाए! 

Happy Parenting!

5 Comments

  1. True thoughts, but somehow the scenario of metro cities, where both parents are working to support the financial needs and alsonthe career needs. But it is really a nice post to give a thought

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