अपने प्रियजन की मृत्यु के शोक से हम कैसे उबरे ?

अपने प्रियजन की मृत्यु के शोक से हम कैसे उबरे ? 

मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सत्य है और धरती पर आया हर व्यक्ति एक न एक दिन मृत्यु को प्राप्त होता ही है, चाहे वह मृत्यु प्राकृतिक रूप से हो, या किसी व्याधि अथवा दुर्घटना आदि के कारण। मृत्यु किसी की भी हो दुखदायी ही होती है, पर जब किसी  अपने खास प्रियजन की मृत्यु हो जाए तो मन को बहुत ही गहरा सदमा लगता है। मन एकदम से उदास हो जाता है। कोई कोई तो एकदम से किंकर्तव्यमूढ़ हो कर एकदम से चुप हो जाता है, उसे कोई भी बात समझ मे नहीं आती है। तो कोई बहुत ज़ोर ज़ोर से रोने लगता है तो कोई ज़ोर ज़ोर से विलाप करने लगता है।

जब भी कहीं किसी की मृत्यु होती है, तो वह किसी न किसी व्यक्ति के लिए खास होता है। ऐसे में उस व्यक्ति की मृत्यु उसके घनिष्ठ संबंधियों के लिए बहुत बड़ा सदमा होती है।

जीवन में यदि कभी ऐसा क्षण आ जाए, जब हम से हमारा कोई प्रियजन हमेशा के लिए दूर चला जाए तो यह हमारे जीवन का सबसे बुरा वक्त बन जाता है। प्रियजन की यादें भूले नहीं भूलाई जाती हैं। शोक की लहर जीवन में ठहराव ला सकती है.
ऐसे में किसी अपने को खो देने के शोक से लोग बरसो तक उबर नहीं पाते हैं। हमारे लिए यह विश्वास कर पाना कठिन हो जाता है कि जिस व्यक्ति से हम इतना प्यार करते थे, वह अब हमारे बीच कभी लौटकर नहीं आएगा। जब हम किसी अपने को खोते हैं, तो हम अकसर दुख और अवसाद में डूब जाते हैं। ऐसा लगता है कि सब कुछ ख़त्म हो गया।

  • खूब खुल कर रो ले। 
  • जो भी मन मे गुबार आ रहा है उसे शब्दो से निकलने दे.
  • अपने दर्द को बाहर निकलने दीजिये।
  • गुमसुम होकर मत बैठिए, ये आपके शरीर व दिमाग के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • जब तक परिजन की देह घर मे पड़ी है बहुत रोना आता है, रो लीजिये कोई अपना मिलने वाला या रिश्तेदार आए तौ उस से मिल कर अपने दुख का इजहार रो कर या विलाप से होने दीजिये।
  • जब चिता पर पार्थिव शरीर रखा जा रहा हो तौ उस वक़्त बहुत दुख होता है उस वक़्त रोना आए तौ खुल कर रो ले।
  • जब शमशान से घर आ जाए तौ एकदम से सुनापन लगेगा, उस वक़्त जो प्रिय जन चला गया है उसके साथ बिताया हुआ अच्छा समय याद करे। घर वालों के साथ उनकी अच्छाइयो को शेयर करे।
  • हो सकता है कि आप सबके सामने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में हिचकिचाहट महसूस करते हो। तो ऐसे में आप अपने किसी ऐसे मित्र या रिश्तेदार अथवा परिवार जन का सहारा ले जिनसे आप बहुत अधिक प्रेम करते हैं और जिनके साथ आप सहज महसूस करते हैं।
  • अगर ये भी न कर सके तौ उनके साथ बिताया गया अच्छा समय या अच्छी घटनाओ को एक डायरी मे लिख कर अपने मन का बोझ हल्का कर ले ।
  • अपने इष्ट देव से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कीजिये।
  • गायत्री मंत्र का मानसिक पाठ परम पिता परमेश्वर को ये कह कर कीजिये कि वो दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे।
  • कई सामाजिक संस्थाए गरीब लोगो का इलाज करवाती है, आप भी किसी के उपचार का जिम्मा अपने परिजन की आत्मा की शांति के लिए करवा सकते है।
  • उनके नाम से कोई जल मंदिर बनवा सकते है।

बेशक जो उपरोक्त बाते कही गयी है कहना बहुत आसान है लेकिन करना बहुत मुश्किल। जिसका अपना कोई उसको छोड़ कर गया है उसके जाने का दुख सिर्फ वो ही महसूस कर सकता है। जिसके साथ रोज हम समय बिताते हैं, उसका यूं अचानक चले जाना मन को अंदर ही अंदर कचोटता रहता है। हमारी आंखें हर जगह केवल उसी व्यक्ति को ढूंढती रहती हैं।

निष्कर्ष :

जो चला गया है उसे वापस नहीं लाया जा सकता है। हम बस इतना ही कर सकते है कि अपने प्रिय जन की यादों के सहारे अपनी बाकी की जिंदगी को गुजारे। लेकिन  याद रखे कि इन यादों मे आंखो मे आँसू नहीं बल्कि एक ऐसी भावना रखे जो हमेशा आपको यह याद दिलाती रहे कि आप उनसे और वह आपसे कितना प्यार करते थे।

ॐ शांति 

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1 Comment

  1. Very apt and encouraging article, though its difficult to imply but still even if we can apply few things people can cope up with the loss of their beloved

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