मै लोगो के चेहरे भूल जाता हू क्या करू? 

मै लोगो के चेहरे भूल जाता हू , क्या करू? 

मै लोगो के चेहरे भूल जाता हू क्या करू 

मै लोगो के चेहरे भूल जाता हू क्या करू? यह समस्या हम मे से कई लोगो को हो सकती है। आज हम इस पोस्ट मे इस समस्या के बारे मे चरक्झा करेंगे ।

कुछ लोग यू तो बहुत अच्छी याददाश्त के होते है,उनको हर बात याद रहती है, यहा तक कि उनको बचपन मे क्या क्या हुआ, उन्होने बचपन मे क्या क्या  किया सब याद रहता है  पर वो लोग कुछ लोगो के चेहरे बहुत जल्दी भूल जाते हे। उनकी इस आदत से उनको बहुत तकलीफ होती है। मे ऐसे एक व्यक्ति को जनता हू , वो बचपन से ही बहुत अच्छी याददाश्त के व्यक्ति है, वो अभी 60+ की उम्र के है, उनको वो सब बाते याद है जो उन्होने बचपन मे करी या बचपन मे लोगो को कही है। यहा तक कि उन्होने जब वो दसवी कक्षा मे पढ़ते थे तो एक नाटक मे भाग लिया था उस नाटक के सारे संवाद उनको याद है, उनको अपने दसवी बोर्ड के रोल नंबर याद है। पर अक्सर वो लोगो के चेहरे भूल जाते हे। ये आदत उनको बचपन से है। वो जब M॰ Sc॰ कर रहे थे उनका एक अभिन्न मित्र था दोनों 24 घंटे साथ रहते थे । फिर दोनों अपनी पढ़ाई पूरी कर अलग अलग नोकरी करने लग गए। एक दिन वो ट्रेन से कही जा रहे थे तौ उन्होने भोपाल मे अपनी बहन, व उस दोस्त हो खबर करी कि वो फलां फलां ट्रेन से भोपाल से गुजरेंगे तौ उनकी बहन और दोस्त स्टेशन पाहुच गए नियत समय पर। वो ट्रेन रुकने पर अपनी बहन से मिले साथ मे जो लोग थे सबको अभिवादन किया। उन लोगो मे उनको वो अभिन्न मित्रा भी था, पर वो उसका चेहरा भूल्क गए और अपनी बहन से पूछा कि मेरा दोस्त कहा है ? तब उंजों बहन ने कहा  कि जो तुमहरे पास खड़ा है वो ही तुम्हारा दोस्त । तब दोनों दोस्त गले मिले बाते करी ।

ऐसे ही अभी वो एक किसी सामाजिक कार्यक्रम मे गए वह उंजों एक व्यक्ति ने उनको नमस्कार किया और उनको पूछा कि उन्होने उनको पहचाना उन्होने हा तौ कर दी पर वो वास्तव मे उंनकों नहीं पहचान पाये। सामने वाला समझ गया कि वो नहीं पहचान पाये तू उन्होने पुच लिया कि वो कोण है, तब वो बोले कि हा मे नहीं पहाहाँ पा रहा हु। तब उन्होने अपना परिचय दिया, तब वो बड़े शर्मिंदा हुये, बहुत समय पहले दोनों ने एक प्रोजेक्ट पर एक लंबे समय तक साथ काम किया था। बाद मे उंजों सब याद आ गया। 

अब प्रश्न ये उठा है कि आखिर ऐसा क्यू होता है? यह एक प्रकार की बीमारी है जिसे Face Blindness कहते है। जिसे मेडिकल साइंस मे prosopagnosia कहते है । यह एक लाइलाज बीमारी है।  what is prosopagnosia: फिल्मी दुनिया के दो एक्टर ब्रैड पिट और शहनाज ट्रेजरीवाला प्रोसोपैग्नोसिया से पीड़ित हैं। इससे पीड़ित लोगों के लिए दुसरे लोगों के चेहरों को पहचानना लगभग असंभव होता है। इससे पीड़ित व्यक्ति के लिए अपने निजी लोगों को भी पहचाने में दिक्कत आती है। कुछ मरीजों के साथ अपने स्वयं के चेहरे को आईने में या चित्रों में पहचान पाना मुश्किल हो जाता है।

शाहिद कपूर (Shahid kapoor) के साथ ‘इश्क विश्क’ से बॉलीवूड में अपना करियर शुरू करने वाली एक्ट्रेस शहनाज ट्रेजरीवाला (Shenaz Treasury) लाइलाज दिमागी बीमारी प्रोसोपैग्नोसिया (prosopagnosia) से जूझ रही है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें लोगों के चेहरे याद रखना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने इसकी जानकारी अपने इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए कहा है कि मुझे प्रोसोपैग्नोसिया 2 है। अब, मैं समझ पा रही हूं कि मैं चेहरे क्यों नहीं पहचान पाती। यह एक संज्ञानात्मक विकार है। मुझे हमेशा शर्म आती थी कि मैं चेहरे पहचान नहीं पाती। एक्ट्रेस ने बताया कि इसे फेस ब्लाइंडनेस (Face Blindness) भी कहते हैं।

भारत की कुल आबादी के 2.5 प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रसित है। दिल्ली एनसीआर स्थित न्यूरोलॉजी, मारेंगो क्यूआरजी हॉस्पिटल के एचओडी और सीनियर कंसल्टेंट डॉ नजीब उर रहमान बताते है कि प्रोसोपैग्नोसिया या फेस ब्लाइंडनेस की स्थिति से पीड़ित लोगों के लिए दुसरों के चेहरों को पहचानना लगभग असंभव होता है। यह आमतौर बचपन से ही होता है जो पूरे जीवन के लिए जारी रहता है। इससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। प्रोसोपैग्नोसिया से पीड़ित व्यक्ति के लिए अपने निजी लोगों को पहचाने में भी दिक्कत आती है। कुछ मरीजों के साथ अपने स्वयं के चेहरे को आईने में या चित्रों में पहचान पाना मुश्किल हो जाता है।

क्या होते है इस बीमारी के लक्षण : 

  • इससे पीड़ित व्यक्ति उन लोगों को नहीं पहचान पाते जिनसे वो अचानक मिलते हैं।
  • सार्वजनिक मीटिंग्स में अकेले नहीं रहते हैं।
  • दोस्त बनाने से कतराते हैं

सारांश : 

प्रोसोपैग्नोसिया के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं जो चेहरे की पहचान में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। वैकल्पिक रणनीतियाँ जो व्यक्ति की पहचान में मदद कर सकती हैं जैसे कि व्यक्ति की आवाज़, कपड़े या उनकी चलने की शैली कुछ लोगों के लिए काम कर सकती है। हालाँकि, ये तब सपाट हो सकते हैं जब वे किसी ऐसे व्यक्ति से मिलते हैं जिसे वे किसी अप्रत्याशित स्थान पर जानते हैं या जिन्होंने अपना रूप बदल लिया है।वे फिल्मों या शो की कहानी का समझने में मुश्किल होती है।

फिर भी हमे हार नहीं माननी चाहिए, लोगो के चेहरे हमे याद करने के लिए उन लोगो से मिलते रहना चाहिए या उनके फोटो देखते रहना चाहिए इत्यादि इत्यादि । मुझे पूरा विश्वास है की हम इस बीमारी से बहुत हद तक बाहर निकाल सकते है।

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