अगर रात में नींद न आये तो क्या करे | अनिद्रा के उपाय | नींद न आने की बीमारी का इलाज

अगर रात में नींद न आये तो क्या करे | अनिद्रा के उपाय | नींद न आने की बीमारी का इलाज

देर रात तक जागते रहना, आधी रात में जग जाना या नींद का बार-बार टूटना, ये संकेत हैं, जो अनिद्रा का शिकार होने की ओर इशारा करते हैं। 

विश्व की लगभग एक तिहाई जनसंख्या नींद की समस्या से जूझ रही है, जबकि 10 प्रतिशत लोग अनिद्रा का शिकार हैं। 

जीवनशैली में बदलाव आने से वैसे ही अनिद्रा की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। कोविड-19 महामारी ने नींद न आने से परेशान लोगों की संख्या में पिछले एक-डेढ़ वर्षों में तेजी के साथ  इजाफा किया है।

अनिद्रा के लक्षण क्या हैं 

अनिद्रा एक बीमारी और लक्षण दोनों है। जब यह बीमारी होती है तो इसे प्राइमरी इन्सोम्निया कहते हैं, यानी अनिद्रा की समस्या किसी स्वास्थ्य समस्या या स्थिति से जुड़ी नहीं है। 

लेकिन कई बार ऐसा होता है कि किसी स्वास्थ्य स्थिति जैसे अस्थमा, अवसाद, आथ्राइटिस, कैंसर, दर्द या नशीले पदार्थों के सेवन के कारण नींद नहीं आती, तो उसे सेकंडरी इन्सोम्निया कहते हैं। 

इसलिए प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों ही इन्सोम्निया का गंभीरता से लेना चाहिए और उपचार कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।

न्यूरोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट का कहना है, ‘की अनिद्रा की स्थिति तब मानी जाती है, जब रात में सोने में परेशानी आती है| 

दिन में कम सोने के कारण सिरदर्द, बदन दर्द, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी जैसी परेशानियां आती हैं। 

जब रात में नींद न आना और दिन में उसका असर, दोनों होता है, तब इन्सोम्निया की समस्या होती है।

पर जब रात में कम सोने पर दिन में कोई समस्या नहीं होती, तब उसे पुअर स्लीप कहते हैं। 

अगर इन्सोम्निया की समस्या तीन महीने से कम रहे, तो उसे एक्यूट इनसोमनिया और तीन महीने से अधिक रहे, तो क्रॉनिक इनसोमनिया कहते हैं।

‘सोने और जागने का चक्र मुख्य रूप से हमारा दिमाग नियंत्रित करता है। 

वह कुछ और चीजों को भी काबू करता है, जैसेकि शरीर के ताप में परिवर्तन, रक्तदाब, और हार्मोनों का स्राव; इसमें मेलैटोनिन रसायन प्रमुख भूमिका निभाता है, इसे ‘अंधेरे का हार्मोन’ भी कहते हैं।

इसकी कमी चौकन्नापन बढ़ाती है और अधिकता उनींदापन, जिससे शरीर स्लीप मोड में आ जाता है। यह हार्मोन मस्तिष्क में मौजूद एक ग्रंथि द्वारा निर्मित होता है|

जो सोने-जागने के चक्र के साथ दूसरे सिर्केडियन रिदम में भी खास भूमिका निभाता है। सिर्केडियन रिदम डिसॉर्डर के कारण ही सोने में परेशानी आती है।

क्या नींद की गोली खाना उचित है 

बिना डॉक्टर की सलाह ना खाएं नींद की गोलियां ‘नींद की गोलियों को सबसे हानिकारक/ दवाओं में से एक माना जाता है, इसके बहुत साइड इफेक्ट होते हैं। 

नींद की गोलियां अनिद्रा के रोगियों को सुला तो देती हैं, लेकिन नींद क्यों नहीं आ रही, उस कारण को ठीक नहीं करती हैं।

लगातार एक सप्ताह तक इनका सेवन आपको इनका आदी बना सकता है। कई लोगों के साथ होता है कि शुरुआत कम मात्रा वाली दवा से होती है, पर बाद में मात्रा बढ़ती जाती है।

नींद की गोली से रात में नींद तो आ जाती है, लेकिन दिन में व्यक्ति तरोताजा महसूस नहीं करता। उस पर उनींदापन छाया रहता है। सिरदर्द होना और चक्कर आना जैसी परेशानियां होती हैं। इनके कारण पाचन शक्ति प्रभावित होती है| 

जिससे पेट दर्द, एसिडिटी, कब्ज, डायरिया और अपच जैसी समस्याएं हो जाती हैं। हाथ-पैरों में झुनझुनी चलती है। लगातार नींद की गोलियों के सेवन से कमजोरी महसूस होती है और शरीर का संतुलन बनाने में परेशानी आती है।

नींद की गोलियां, सामान्य रूप से सांस लेने की जो प्रक्रिया है, उसमें रूकावट डालती हैं। इसलिए जिन लोगों को श्वसन तंत्र से सम्बंधित समस्याएं, जैसे अस्थमा, सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज), ब्रोंकाइटिस आदि हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही इनका सेवन करना चाहिए।

‘पिछले डेढ़ वर्षों में कोविड-19 महामारी के कारण हमारा जीवन कई तरह से प्रभावित हुआ है। लोगों की दिनचर्या बदल गई, वो ऑफिस जाने की बजाय घर से काम करने लगे, कई तरह की मानसिक, शारीरिक व सामाजिक चिंताएं और तनाव लोगों की जिंदगी से जुड़ गए हैं।

कई लोगों ने अपनों को खोया है। जो लोग कोविंड से ठीक हो गए, वो उस ट्रॉमा बाहर नहीं आ पाए हैं। लोगों में से तनाव, एंग्जाइटी व डिप्रेशन बढ़ा है। इन सब चीजों ने लोगों की नींद पर असर डाला है। घरों में रहने के कारण नियमित दिनचर्या पर असर पड़ा है।

साथ ही, गैजेट्स का इस्तेमाल भी पहले से बढ़ा है। इस वजह से भी नींद की समस्या बढ़ी है। पहले जहां अनिद्रा के शिकार लोग कुल जनसंख्या का 10 प्रतिशत थे, वह पिछले डेढ़ वर्षों में 25-30 प्रतिशत हो गए हैं। ‘पुअर स्लीप यानी ठीक से नींद न आने के मामले भी 50-60 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

अनिद्रा के उपाय क्या है 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अनिद्रा एक सबसे आम और गंभीर स्लीप डिसॉर्डर है। डॉ. भाटिया कहती हैं, ‘अगर अनिद्रा की समस्या लगातार बनी हुई है, तो विशेषज्ञ को दिखाएं। कम उम्र से ही नींद की गोलियां खाने की बजाए नींद लाने के स्वस्थ तरीके अपनाएं। कई थेरेपी हैं, जो फायदा करती हैं।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) क्रॉनिक इन्सोम्निया के उपचार के लिए सीबीटी को सबसे बेहतर माना जाता है। इसमें मरीज के सोचने के ढंग और व्यवहार पर काम किया जाता है। इसमें नकारात्मक विचारों और व्यवहार की पहचान कर उन्हें अच्छे विचारों और व्यवहार से बदलने का प्रयास किया जाता है। सीबीटी मरीज को उन विचारों और चिंताओं को नियंत्रित करने या खत्म करने में सहायता करती है, जो उन्हें जगाए रखते हैं।

लाइट थेरेपी

यह उन लोगों के लिए अच्छी मानी जाती है, जो इन्सोम्निया, सिर्काडियन रिदम स्लीप डिसॉर्डर्स और डिप्रेशन के शिकार होते हैं। इसे फोटोथेरेपी या ब्राइट लाइट थेरेपी भी कहते हैं। इसमें विशेष डिजाइन किए गए लाइट बॉक्स इस्तेमाल किए जाते हैं।

ऑक्सीजन थेरेपी

उच्च स्तर की ऑक्सीजन का एक्सपोजर मस्तिष्क को डीप रेस्टोरेटिव स्लीप में जाने में सहायता करता है। इस थेरेपी से मरीज का मस्तिष्क रिलैक्स हो जाता है, दिन में उसका मूड बेहतर रहता है और स्टेमिना भी बढ़ता है।

ऐसे आएगी अच्छी नींद

अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन (एपीए) के अनुसार, इन उपायों से प्राइमरी इन्सोम्निया की समस्या से लगभग छुटकारा पा सकते हैं,

सोने-उठने का एक नियमित समय बना लें। एक बार कड़ाई से पालन करने पर, रोज उसी समय नींद आने लगेगी छुट्टी के दिन भी इसी समय को अपनाएं। इससे जैविक घड़ी भी सही रहेगी।

उठने के बाद खिड़कियां और पर्दे खोल दें, ताकि प्राकृतिक रोशनी कमरे में आए। अगर उठने के बाद भी कृत्रिम रोशनी में रहेंगे, तो मेलैटोनिन स्विच ऑफ नहीं होगा और आप उनींदा महसूस करेंगे। सूरज की रोशनी में कुछ समय जरूर बिताएं।

कैफीन व निकोटिन के सेवन से भी बचें। भारी खाना भी न खाएं।

दोपहर में सोने से बचें। अगर जरूरी हो तो तीन बजे के पहले सोएं। दोपहर में झपकी 15 मिनिट से अधिक न लें।

अगर सोने से पहले रिलैक्स होना चाहते हैं, तो नहाएं, कोई किताब पढ़ें या हल्का संगीत सुनें। सोने के कमरे में अंधेरा और शांति होनी चाहिए। तापमान न बहुत अधिक होना चाहिए, न बहुत कम।

नियमित व्यायाम करें, पर सोने से पहले कड़ी एक्सरसाइज न करें। • अगर कोई चिंता है, तो सोने से पहले उस हालात से बाहर आने का प्रयास करें।

सोने से एक घंटा पहले गैजेट्स का प्रयोग बंद कर दें।

कितनी नींद चाहिए आपको?

आपको कितनी नींद की जरूरत है, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। उम्र के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक दिन में इतने घंटे सोने की सिफारिश की है:

 नवजात शिशुः 16-18 घंटे

एक से पांच साल तकः 11-12 घंटे 

स्कूल जाने वाले बच्चेः 10 घंटे या अधिक 

किशोरः 9-10 घंटे

युवा और बुजुर्गः 7-8 घंटे

अनिद्रा के घरेलू उपाय

सोने से पहले गर्म दूध पिए, इसमें बादाम पीस कर डालें। इसमें ५ भरपूर कैल्शियम होता है और यह मस्तिष्क को मेलैटोनिन के निर्माण में सहायता करता है। 

मैग्नीशियम से भरपूर भोजन, जैसे- हरी पत्तेदार सब्जियां, कट्टु के बीज और बादाम आदि खाने से नींद अच्छी आती है।

शाम के समय, लेकिन सोने के कम से कम चार घंटे पहले, एक कप ग्रीन टी का सेवन जरूर करें। इसमें उपस्थित अमीनो एसिड शरीर में फील गुड हार्मोन का स्तर बढ़ा कर मस्तिष्क को शांत करता है और अच्छी नींद लाने में सहायता करता है। 

रात में सोने से पहले एक कप दूध में गुड़ का एक छोटा टुकड़ा डाल कर पीना भी नींद लाने में मदद करता है। 

रात के खाने के तुरंत बाद एक केले को मैश करके भुने जीरे के साथ मिलाकर खाने की सलाह भी दी जाती है।

ब्राहमी का प्रयोग: यह औषधि अनिद्रा में अत्यंत लाभ देती है। रात्रि के समय चूर्ण के रूप में अथवा उबाल कर इसका काढ़ा पीने से या फिर किसी भी रूप में ब्राहमी का सेवन अनिद्रा के रोग में बहुत लाभकारी है।

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