गायत्री मंत्र की महिमा का वर्णन कीजिये

Gayatri Mantra
Gayatri mantra

गायत्री मंत्र की महिमा का वर्णन कीजिये

गायत्री मंत्र को हिन्दू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण  मंत्र माना जाता है. यह मंत्र हमें ज्ञान प्रदान करता है| इस मंत्र का मतलब है – हे प्रभु, कृपा करके हमारी बुद्धि को उजाला प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये. यह मंत्र सूर्य देवता के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता । 

ऊँ भूर्भवः स्वः तत्सवितुर्वरेवणयम्,

भर्गो देवस्य धीमिहि धियो योनः प्रचोदयात्।

भावार्थ : भूलोक, अंतरिक्षलोक, स्वर्ग लोक समस्त प्राणियों के परमपिता, ज्ञान रूप प्रकाश को देने वाले उस ब्रह्म स्वरूप को ध्यान में रखकर हम नमन करते हैं, जो हमारी बुद्धि को तम  यानि अंधकार से निकालकर सत यानि प्रकाश के मार्ग की ओर प्रवृत्त करे।

गायत्री मंत्र की महिमा का वर्णन :

गायत्री मंत्र की महिमा से हमे  यह प्रार्थना करनी चाहिए कि हमें सही प्रकाश दिखाए और हमें सत्य पथ पर ले जाए| हमें सही रास्ता दिखाए। यू तौ गायत्री मंत्र की महिमा अपरंपार है, इसकी महिमा का वर्णन व लाभ के बारे मे चर्चा करना सूर्य को दिया दिखने के समान है। फिर भी कुछ महत्वपूर्ण महिमा व फायदे निम्न है: 

    • वेदों की कुल संख्या चार है। इन चारों वेदों में गायत्री मंत्र का उल्लेख किया गया है। माना जाता है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित इसका जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्तियां यानी भूत-प्रेत और ऊपरी बाधाएं नहीं फटकती हैं।
    • गायत्री मंत्र की महिमा आपको बीमारी से निदान दिलाने में भी है।  जब भी आपको कोई बीमारी या शारीरिक तकलीफ हो तो गायत्री मंत्र का पाठ अवश्य करें।  तुरंत फायदा होगा। 
    • छात्रों के लिए यह मंत्र बहुत ही फायदेमंद है। ऋषिओ ने कहा है कि गायत्री मंत्र सद्बुद्धि का मंत्र है, इसलिऐ उसे मंत्रो का मुकुटमणि कहा गया है।” नियमित 108 बार गायत्री मंत्र का जप करने से बुद्धि प्रखर और किसी भी विषय को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता बढ़ जाती है। इसीलिए छात्रों को इसका पाठ अवश्य करना चाहिए। यह व्यक्ति की बुद्धि और विवेक को निखारने का भी काम करता है।
    • गायत्री मंत्र में चौबीस अक्षर हैं। यह चौबीस अक्षर चौबीस शक्तियों-सिद्धियों के प्रतीक हैं। यही कारण है कि ऋषियों ने गायत्री मंत्र को भौतिक जगत में सभी प्रकार की मनोकामना को पूर्ण करने वाला बताया है।
    • आर्थिक मामलों परेशानी आने पर गायत्री मंत्र के साथ श्रीं का संपुट लगाकर जप करने से आर्थिक बाधा दूर होती है। जैस ‘श्रीं ॐ भूर्भव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् श्री’।
    • गायत्री मंत्र के जाप इसकी महिमा से  आपके उत्साह में वृद्धि होती है और आप खराब से खराब परिस्थितियों का सामना भी कर लेते हैं। 
    • गायत्री मंत्र की महिमा से मिल जाती है विलक्षण शक्ति।  इससे आपको कई बातों का पूर्वाभास भी होने लगता है। 
    • गायत्री मंत्र की महिमा व जाप से आपका क्रोध भी शांत होने लगता है। जब भी आपको क्रोध आने लगे आप गायत्री मंत्र का मानसिक पाठ प्रारंभ कर देवें।  क्रोध शांत होगा। गायत्री मंत्र की महिमा से आप बुराइयों से दूर रहते हैं और हमेशा मन में अच्छे विचार आते हैं। 

गायत्री मंत्र जप का समय: गायत्री मंत्र जपने का यूं तो कोई निर्धारित समय नहीं है पर शास्त्रों के अनुसार 3 उचित समय बताए गए हैं।  

पहला सूर्योदय से पहले इसमें सूर्योदय से पहले मंत्र जाप प्रारंभ करके सूर्योदय होने के बाद तक मंत्र जप करते रहना चाहिए।  

दूसरा दोपहर में भी गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है 

तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त से पहले इसमें गायत्री मंत्र का जाप सूर्यास्त होने से पहले प्रारंभ कर सूर्यास्त पुणे तक पाठ करना उचित व फायदेमंद माना गया है। 

गायत्री मंत्र का जाप ज्यादातर मानसिक रूप से ही करना चाहिए।  जहां तक संभव हो इसका जाप रुद्राक्ष की माला से करें तो ज्यादा अच्छा फल मिलेगा। अगर आपके पास रुद्राक्ष की माला है तो अति उत्तम है यदि नहीं है तौ आप +91 9610020545 पर फोन करके अभिमंत्रित रुद्राक्ष माला मँगवा सकते है। 

इस मंत्र का जाप जहां तक संभव हो किसी पवित्र स्थान पर करें तो अच्छा है ।

 माँ  गायत्री व परम पिता परमेश्वर की कृपा अवश्य मिलेगी। 

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