बिक्री की कला से दस गुना करे अपनी बिक्री

बिक्री की कला से दस गुना करे अपनी बिक्री

बिक्री की कला:

बिक्री  की कला एक बहुत ही गहन अध्ययन है।  यह कोई ऐसे ही नहीं है कि आप बाजार गए और अपना सामान या प्रोडक्ट बैच कर आ गए।  इसके लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है। एक किसी प्रोडक्ट को दुकानदार को बेचने में किन-किन पायदान ओं से गुजरना पड़ता है हम उसके बारे में विस्तृत से बात करेंगे।

बेचने की कला को हम पांच निम्न भागों में बांट सकते हैं:

1।  तैयारी करना

2।  जानकारी हासिल करना

3।  जानकारी को  उपयोग मे  लेना

4। आपत्तियों का समाधान करना

5। ऑर्डर बुक करना याने कि माल बेचना

तो हम एक-एक करके उपरोक्त भागो की विस्तृत में चर्चा करेंगे।

बिक्री की कला से दस गुना करे अपनी बिक्री - 15 SEPTEMBER 2022: बिक्री की कला से दस गुना करे अपनी बिक्री feature post image. (Photo by Canva.com) - Provided by https://bigfinder.co.in/

सबसे पहले हम तैयारी के बारे में बात करेंगे: आप सोच रहे होंगे कि तैयारी क्या करनी है माल ही  तो बेचना  है। मगर ऐसा नहीं है

आप रेडियो पर रोज गाने सुनते हैं तो क्या आपको लगता है कि यह गायक कलाकार सीधे अपने घर से निकल कर  स्टुडियो  गए गाना रिकॉर्ड करा कर आ गए नहीं ऐसा नहीं है उनको भी हर गाने से पहले रिहर्सल करनी पड़ती है।

इसी प्रकार आपने किसी टैक्सी ड्राइवर को भी देखा होगा कि वह सुबह अपनी टैक्सी को सबसे पहले साफ करता है उसकी साफ सफाई करता है उसका बोनट खोल कर उसके इंजन को चेक करता है कूल एंड को चेक करता है वाईपर के टैंक को देखता है उस में पानी है या नहीं है टायर की हवा चेक करता है उसके बाद वह टैक्सी को लेकर जाता है।
एथलीट या खिलाड़ी भी पहले अपने आप को वार्मअप करता है

तो सेल्समैन तैयारी क्यों नहीं करें?

अब सवाल यह उठता है कि सेल्समैन क्या-क्या तैयारी करें तो तैयारी हमारी अपने घर से शुरू हो जाती है ऐसा तो नहीं है कि हम सुबह उठे और सीधे अपने ऑफिस आ गए और अपने सामान की वैन लेकर मार्केट चले गए। वह कहते हैं ना कि फर्स्ट इंप्रेशन इज द लास्ट इंप्रेशन, इसलिए सेल्समैन को रोजाना दाढ़ी बना कर नहा धोकर अच्छे साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ऑफिस जाना चाहिए यह तो हुई अपने घर से तैयारी।

अब हमें ऑफिस आ कर मार्केट जाने से पहले क्या क्या तैयारी करनी चाहिए उसके बारे में चर्चा करेंगे।

सबसे पहले तो हमें जो प्रोडक्ट भेजना है उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल होनी चाहिए
इस प्रोडक्ट के क्या-क्या फायदे हैं?
इस प्रोडक्ट की क्या कीमत है,
इसके कंपीटिटर प्रोडक्ट की क्या रेट है इत्यादि इत्यादि।
उसके बाद हम अगर रेडी स्टॉक लेकर मार्केट में जा रहे हैं तो हमारी वैन में क्या क्या प्रोडक्ट है यह जानना जरूरी है।

सेल्समैन को मार्केट जाने से पहले अपने साथ क्या-क्या ले जाना चाहिए उसकी भी पूरी तैयारी कर लेनी चाहिए:

जैसे कि ऑर्डर बुक पेन वैसे तो आजकल मोबाइल से या गैजेट से ऑर्डर बुक होते हैं तो हमें यह भी देखना चाहिए कि हमारे मोबाइल में जो सॉफ्टवेयर लगा हुआ है या गैजेट में लगा हुआ है वह काम कर रहा है या नहीं हमारा मोबाइल गैजेट की बैटरी चार्ज है या नहीं।
हम बाजार जाने से पहले हमारे साथ में पीओपी मटेरियल पोस्टर वगैरा-वगैरा गाड़ी में है या नहीं।
हमारी वेन की स्थिति कैसी है कहीं ऐसा तो नहीं कि वेन मे  हवा कम हो थोड़ा आगे जाकर गाड़ी पंचर हो जाए यह सब चीजें हमें देखनी चाहिए
हमें यह भी पता होना चाहिए कि किस प्रॉडक्ट  पर क्या स्कीम चल रही है कौन सा प्रोडक्ट पुरानी रेट का है व कोण सा नई रेट का है हमें जान लेनी चाहिए और इसी को तैयारी कहते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि हमें तैयारी क्यों करनी चाहिए?

तैयारी से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है,
दुकानदार हम पर हावी नहीं हो सकता है ।
हमारा दुकानदार के साथ अच्छा संबंध बन जाता है
और हमें अपना टारगेट पूरा करने में मदद मिलती है।  अब हमें यह देखना है कि हमारा टारगेट क्या है टारगेट की चर्चा से पहले मैं आपको एक घटना बताना चाहता हूं कि पांडव जब अपने गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा ले रहे थे  तो एक  दिन गुरुजी ने उनकी धनुर्विद्या की परीक्षा लेनी चाहिए उन्होंने अपने सभी छात्रों से कहा कि सामने पेड़ पर चिड़िया बैठी है उसकी आंख को भेदना है।  द्रोणाचार्य जी ने एक-एक कर सभी से पूछा कि आपको क्या दिखाई पड़ रहा है किसी ने कहा कि मुझे पेड़ दिखाई पड़ रहा है पेड़ पर बैठी चिड़िया दिखाई पड़ रही है किसी ने कहा कि मुझे पेड़ चिड़िया उसके पीछे दूसरे जो पेड़ हे  वह भी दिखाई दे रहे हैं और जानते हैं आप अर्जुन ने क्या कहा अर्जुन ने कहा गुरुदेव मुझे सिर्फ चिड़िया की आंख दिखाई दे रही है तो इसी प्रकार हर सेल्समैन को  सिर्फ चिड़िया की आंख दिखाई देनी चाहिए कि आज मुझे कोनसा प्रोडक्ट कितनी मात्रा  में कितनी दुकानों पर बेचना है?

अब हम बैचने की कला के दूसरे भाग जानकारी हासिल करना  के बारे में बात करेंगे।

सेल्समैन को बाजार में दुकान पर जाकर क्या-क्या जानकारी हासिल करनी चाहिए?

दुकानदार का मूड,
बाजार में व्यापार की स्थिति कैसी है,
दुकान की कंडीशन कैसी है दुकान में माल है या दुकान खाली-खाली नजर आ रही है,
दुकान में हमारे प्रोडक्ट की क्या स्थिति है इतनी आदेश से अभी चीजों की हमें जानकारी करनी चाहिए ।

यह सब जानकारी हासिल करने के लिए हमें दुकानदार के साथ संपर्क स्थापित करना पड़ता है। हम दुकानदार के साथ किस तरह से संपर्क स्थापित करें?

सबसे पहले हमें उसको बनती कोशिश उसी उसी की भाषा में नमस्कार करना चाहिए,
हाथ मिलाना चाहिए,
मधुर भाषा में बात करना चाहिए ,
हम जब दुकान में प्रवेश करते हैं तो हम को देखते ही दुकानदार के चेहरे पर क्या भाव आते हैं?
यह भी हमें देखना चाहिए दुकानदार ने जब हम से हाथ मिलाया है तो उसका हाथ मिलाने में गर्मजोशी है या नहीं यह भी हमें हमारे टारगेट को प्राप्त करने में मदद करता है।

लेकिन दुकानदार के साथ संपर्क साधना इतना आसान भी नहीं है क्योंकि इसमें भी कई रुकावटें हैं जैसे कि:

फोन कॉल,
दुकानदार का मूड,
दुकान में ग्राहकों की भीड़,
दुकानदार की व्यक्तिगत समस्याएं,
हम से पहले दूसरे किसी कंपनी के सेल्समैन का वह  होना,
दुकानदार की  आपत्तियां  इत्यादि इत्यादि

इन सब चीजों से हमें दुकानदार के साथ संपर्क साधने में रुकावट आती है । हमें इन रुकावट ओं का सामना करते हुए हमारा टारगेट प्राप्त करने के लिए कोशिशें करनी चाहिए जैसे कि:

जब दुकानदार फोन पर व्यस्त है तो हमें इंतजार करना चाहिए कि फोन से फ्री हो जावे,
अगर दुकानदार किसी ग्राहक के साथ व्यस्त है तो हमें इंतजार करना चाहिए कि वह ग्राहक से फ्री हो जाए,
अगर दुकानदार कुछ उदास नजर आ रहा है तो हमें बहुत ही मधुर भाषा में उसके साथ पूछना चाहिए कि कोई व्यक्तिगत समस्या है मैं कैसे मदद कर सकता हूं इत्यादि इत्यादि,
दुकानदार का अगर मूड ठीक नहीं है तो हमें हमारी डायलॉग मास्टरी के द्वारा उसका मूड ठीक करना चाहिए आप लोगों ने  शोले पिक्चर देखी होगी जिसमें गब्बर सिंह पूछता है अरे ओ सांबा कितने आदमी थे रे , यह डायलॉग मैं समझता हूं आप लोगों को अभी तक याद होगा इसी प्रकार से सेल्समेन को भी कुछ ऐसी डायलॉग याद रखना चाहिए कि जो हर दुकानदार याद रखें कि उस कंपनी का सेल्समेन आता है वह क्या बात करता है उसके क्या डायलॉग होते हैं तो इस प्रकार आप के डायलॉग व आपकी बातचीत करने के तरीके से दुकानदार का मूड भी ठीक हो जाता है।
अगर आपसे पहले किसी दूसरी कंपनी का सेल्समैन दुकानदार से बात कर रहा है तो हमें इंतजार करना चाहिए।

इन सब   रुकावटो के कारण हमें दुकान में इंतजार करना पड़ता है तो हमें इस समय का उपयोग करना चाहिए जैसे कि:

हमारे प्रोडक्ट शेल्फ  में किस प्रकार जमे हुए हैं
कहीं हमारे कंपीटिटर  का प्रोडक्ट हमारे प्रोडक्ट  के आगे तो नहीं रखा हुआ है
कौन कौन से प्रोडक्ट कम हो गए हैं
कौन कौन से प्रोडक्ट खत्म हो गए हैं

यह सब जानकारी हमें उस इंतजार के समय में पता लगानी चाहिए। इसी समय में हमें हमारे कंपनी के पीओपी मटेरियल जैसे कि पोस्टर बैनर इत्यादि दुकान में लगाने चाहिए। उसी समय हमें दुकानदार की सेल में हमारे प्रोडक्ट को सही तरीके से जमा देना चाहिए।

यह जो सारी हमने जानकारियां हासिल की है उससे हमें हमारी दुकानदार के साथ किस प्रकार का लागे बढ़ेगी कि हमें जानकारी हो जाती है साथ ही साथ हमें हमारा टारगेट भी वही बन जाता है और हमें टारगेट हासिल करने में सुविधा हो जाती है।

अब हमें इन जानकारी को उपयोग में लाकर हमें हमारा टारगेट यानी कि माल बेचना मैं किस प्रकार मदद मिलती है के बारे में चर्चा करेंगे।

यही है बेचने की कला का तीसरा भाग यानी की जानकारियों का उपयोग में लेना:

जो भी हमें ऊपर जानकारियां मिली है उससे हमें हमारी कॉल को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है जैसे कि:

नमस्कार :दुकानदार  द्वारा हमारे नमस्कार  का जवाब देने का तरीका-  अगर उसने आपके नमस्कार का जवाब गर्मजोशी से दिया है तो आपको अंदाजा हो जाएगा कि आज आपको आर्डर मिलने का मौका है:
हाथ मिलाने का तरीका: अगर दुकानदार मैं आपके साथ गर्मजोशी से हाथ मिलाया है तो आपको समझ जाना चाहिए कि हमें ऑर्डर मिलने का पूरा पूरा मौका है।  अगर दुकानदार ने हाथ मिलाने में गर्मजोशी नहीं दिखाई है तो आपको समझ जाना चाहिए कि ऑर्डर मिलने में कुछ दिक्कत है तो हमें उसी हिसाब से उससे बात करके आर्डर लेने के लिए कोशिश करनी चाहिए।
दुकानदार की बातचीत करने का तरीका व उसकी भाषा: अगर दुकानदार मैं आपसे अच्छी तरीके से बातचीत करी है वह मधुर भाषा में बात कर रहा है तो आपको आर्डर मिलने का पूरा पूरा मौका है।
दुकानदार की शेल्फ मिली जानकारी –  दुकानदार की शेल्फसे जो आपको जानकारी मिली है उससे आपको अंदाजा हो जाता है कि आर्डर मिलेगा या नहीं।  जैसे कि अगर सेल्फ में माल कम हो गया है या खत्म हो गया है तो आपको आर्डर मिलने का अच्छा मौका है।

अब हम बात करेंगे बेचने की कला के  चौथे भाग  हैंडलिंग ऑब्जेक्शन यानी कि आपत्तियों का सामना करना:

हमें पहले यह समझना पड़ेगा कि ऑब्जेक्शन यानी की आपत्तियां क्या है?

ग्राहक कभी-कभी बिक्री प्रस्तुति के दौरान या जब उन्हें ऑर्डर देने के लिए कहा जाता है, तो वे विरोध करते हैं। इस प्रतिरोध को OBJECTION के रूप में जाना जाता है।

ये ऑब्जेक्शन यानी कि विरोध या आपत्ति किसी भी प्रकार की हो सकती है आमतौर से यह दो प्रकार की होती है:

मनोवैज्ञानिक आपत्तियां
तार्किक आपत्तियां

मनोवैज्ञानिक आपत्तियों में शामिल हैं ………………

हस्तक्षेप का प्रतिरोध, स्थापित आदतों को वरीयता।
कुछ देने की अनिच्छा।
दूसरे व्यक्ति या उत्पाद के बारे में अप्रिय संबंध।
वर्चस्व का विरोध करने की प्रवृत्ति।
पूर्वनिर्धारित विचार।
निर्णय लेने में कमी।

तार्किक आपत्तियां:

कीमत

गुणवत्ता

वितरण कार्यक्रम

कुछ उत्पाद

कंपनी की विशेषताएं या  नीतिया

मनोवैज्ञानिक या तार्किक आपत्तियाँ क्या करती हैं……….?

ये आपत्तियां हमें असहज बनाती हैं
कॉल के बीच एक बाधा आती है
हम निराश महसूस करते है

लेकिन हमें समझना होगा कि डीलरों को आपत्ति क्यों है?

हमें यह समझना होगा कि…………
सभी आपत्तियां वास्तविक अर्थों में आपत्तियां नहीं हैं।
डीलर संतुष्ट होना चाहता है।
डीलर इसके बारे में अधिक जानना चाहता है उत्पादों और प्रचार के बारे मे।
डीलर अपना महत्व दिखाना चाहता है।
आपत्ति जो भी हो, हमें उसे सुलझाना ही होगा। लेकिन इसे सुलझाना आसान नहीं है……..

चूंकि…………

हम पूरी तरह से तैयार नहीं हैं
हम इसे व्यक्तिगत रूप से लेते हैं।
हम खुद को श्रेष्ठ समझते हैं।
हम डीलर की नहीं सुनते और बहस करने लगते हैं उसके साथ

कारण कुछ भी हो, लेकिन फिर भी हमें आपत्ति को सुलझाना ही है………….

एक विक्रेता को आपत्तियों को संभालने के लिए ……..
सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें।
सेल्समेन को आहत महसूस नहीं करना चाहिए।
डीलरों की आपत्तियों को बहुत ध्यान से सुनें
डीलर से आपत्ति स्पष्ट करने को कहा।
उससे प्रश्न पूछें

प्रश्न पूछना एक कला है

इसके लिए हमें पूरी तरह से तैयार रहने की जरूरत है………..

डीलर से इस तरह से सवाल करना है कि ……..
वह अपने प्रश्न का उत्तर स्वयं देने लगे।
वह खुद अपनी आपत्ति की वैधता से इनकार कर दे।

प्रश्न दो प्रकार के होते हैं:
1. क्लोज एंडेड प्रश्न – जिसका उत्तर सिर्फ हा या ना होता है।
2. ओपन एंडेड प्रश्न – जिससे वार्ता आगे बढ़ती है,
अधिक ओपन एंडेड प्रश्न पूछें।
क्लोज एंडेड प्रश्न तभी पूछें जब आप ‘हां’ के उत्तर के बारे में सुनिश्चित हों, अन्यथा नहीं।
हमें आपत्ति को खरीदने के कारण में बदलने की जरूरत है।
और यह कॉल को बिक्री मे बदलने की ओर ले जाता है
अभी तक हमने तैयारी कर ली, जानकारी हासिल कर ली, जानकारी का उपयोग भी कर लिया,
डीलर की आपत्ति का समाधान भी कर लिया,
अब हम बिक्री की कला के अंतिम भाग पर आते है जिसे बिक्री करना या ऑर्डर लेना कहते है,
इसे अँग्रेजी मे closing the call भी कहते हे।

Closing करने का मतलब ……….

बेचना,
कॉल को उत्पादक बनाना।

कॉल किसे close  करना चाहिए या ऑर्डर किसे लेना चाहिए ? अब आप सोच रहे होंगे  कि ऑर्डर तो डीलर ही देगा , अगर ऐसा हे तौ फिर हमारे टार्गेट का क्या होगा या हमारी बिक्री दस गुना कैसे बढ़ेगी ? हम सिर्फ ऑर्डर लेने (Order Takers)  नहीं है बल्कि अपने हिसाब से ऑर्डर प्राप्त करने वाले है (Order Getters)।

अगर हम दुकान पर गए हमने सारी बातें कर ली जानकारी हासिल कर ली है जानकारी के उपयोग में ले लिया दुकानदार से बात भी कर ली और आर्डर नहीं लिया तो दुकानदार भी सोचेगा कि हम यह किस लिए आए थे।  हमारा मुख्य उद्देश्य है हमारे माल को दुकानदार को अपने हिसाब से भेजना कितना बेचना है क्या क्या बेचना है यह हमें तय करना चाहिए ना कि दुकानदार को लेकिन साथ ही साथ दुकानदार को ऐसा लगे कि हमने ऑर्डर उसके हिसाब से लिया है इसके लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए वह हम आगे चर्चा करेंगे।

सबसे पहले तो हमें यह समझना होगा कि दुकानदार हमसे माल क्यों खरीदता है और हम से खरीद कर वापस क्यों भेजता है? क्योंकि:

वे ‘पैसा, पैसा और अधिक पैसा’ चाहते हैं।
हमारे उत्पादों में उनका आत्मीयता और विश्वास है।
उनमें गर्व की भावना होती है।
वे दूसरों से बेहतर बनना चाहते हैं और अलग दिखना चाहते हैं।

हमें इन उपरोक्त बातों को समझना होगा और अलग-अलग डीलर के हिसाब से हमें इनको उपयोग में लाना होगा परंतु कई सेल्समैन इन सब बातों को नहीं समझ पाते हैं क्योकि :

हम पूरी तरह से तैयार नहीं हैं।
हममें कॉन्फिडेंस की कमी है।
ऑर्डर के लिए प्रश्न पूछने में हम डरते हैं.
अस्वीकृति का डर कि कहीं दुकानदार ऑर्डर देने से मना ना कर देवे।
हम सही मनोवैज्ञानिक क्षण को नहीं पहचानते हैं याने कि बिक्री करने का क्षण।

‘सही मनोवैज्ञानिक क्षण’ को पहचानने के लिए, हमें ‘खरीदने के सिग्नल ‘ ( Buying Signals) को समझने की जरूरत है:

दुकानदार हमें ऑर्डर देने के लिए कुछ विशेष प्रकार के सिग्नल देता है जिन्हें हमें समझना होगा जैसे कि:

आपसे  अभिवादन करने और हाथ मिलाने का उनका तरीका।
आपके दुकान में प्रवेश करते ही उसकी शेल्फ की जाँच करना।
अपने हेल्पर से गोदाम स्टॉक की जांच करने के लिए कहना।
आपके नमूनों (Samples) को ध्यान से देखना ।
आपकी बिक्री प्रस्तुति को ध्यान से सुनना
आपसे प्रश्न पूछना या कोई विरोध प्रकट करना

उपरोक्त किसी भी एक सिग्नल को आप जैसे ही महसूस करें बाकी सारी बातें छोड़कर हमें तुरंत ऑर्डर बुक करने के लिए अग्रसर होना चाहिए । जैसी भी परिस्थिति हो उसके हिसाब से हमें निम्न बिक्री के तकनीक  को उपयोग में लेना चाहिए: :

सीधे ऑर्डर बुक कर लेना चाहिए इसके लिए डीलर को आप में पूर्ण विश्वास हो तब यह संभव हो सकता है
अभी तक हमने डीलर  से जो भी बातें की है उसके ऊपर जिन जिन बातों पर उसने हां कहा है उन को ध्यान में रखते हुए हैं ऑर्डर बुक करना।
डीलर को order ऑर्डर लिखवाने में मदद करना।
ऑर्डर बुक करते समय दुकानदार को कभी भी कितना लिखू मत पूछो बजाय इसके कि आप उसे विकल्प देवे  जैसे कि एक कार्टून दे दु  या दो कार्टून दु।
अगर किसी प्रोडक्ट पर विशेष स्कीम आई हुई है या कोई विशेष  कीमत लागू हुए तो उसे बताएं।
या फिर डीलर पर पी एस ए डी (PSAD) टेक्निक का प्रयोग करें।

यह  पी एस ए डी   (PSAD) टेक्निक  क्या है?

Problem (समस्या): समस्या को समझाएं और स्वीकार करें

Solution (समाधान): उन्हें एक या दो समाधान दें।

Advantage (लाभ) : ख़रीदने के लाभों पर प्रकाश डालें।

Disadvantage नुकसान: खरीदारी न करने के कुछ नुकसानों पर प्रकाश डालें।

खरीदारी न करने के नुकसान पर अधिक जोर दें।

यह पी एस ए डी (PSAD) तकनीक किस प्रकार काम करती है इसका हम नीचे उदाहरण दे रहे हैं:

Problem (समस्या): हम दुकान पर एक प्रोडक्ट लेकर गए मगर दुकानदार ने उसे खरीदने से इनकार कर दिया।

Solution (समाधान): तो हम दुकानदार से कहेंगे कि अच्छा कोई बात नहीं अब मत कीजिए

Advantage (लाभ) : हम दुकानदार से कहेंगे कि जब आप ए प्रोडक्ट नहीं खरीदेंगे तो आपका पैसा इसमें ब्लॉक नहीं होगा यह आपका इसमें फायदा है।

Disadvantage नुकसान: मगर जब यह प्रोडक्ट कोई ग्राहक आपसे टीवी पर देखकर मांगेगा और आपके पास नहीं होगा और यही प्रोडक्ट आपके पास वाली दुकान पर  मिलेगा तो ग्राहक पास की दुकान से वह प्रोडक्ट तो खरीदेगा  ही साथ ही साथ बाकी जो चीजें आपसे खरीदने वाला था वह भी वह पास की दुकान से खरीद लेगा इस प्रकार आपका एक ग्राहक जो आपका था अब वह पास की दुकान का ग्राहक हो गया है इससे आप को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

इस प्रकार जब आप दुकानदार से PSAD  की बात कर रहे है  और आपको लगे कि दुकानदार ने आपको खरीद  सिग्नल भी दे दिया है तो आपको तुरंत सारी बातें बंद करके सिर्फ ऑर्डर बुक करने की ओर अग्रसर होना चाहिए  और अपनी डायरी या गैजेट खोल कर फटाफट उसका आर्डर बुक कर लेना चाहिए। ऑर्डर बुक करने के बाद डीलर को बताए कि आपने क्या क्या बुक किया हे। इसके बाद अपने सप्लायर से कह कर जो आपने ऑर्डर बुक किया है उसे सप्लाई कराये व डीलर को माल चेक कराये । उसके बाद जो माल डीलर कि शेल्फ मे कम हो गया है या खत्म हो गया है उसे शेल्फ मे जमा देवे। ए सब करने कि बाद बाद पेमेंट ले कर डीलर को धन्यवाद कह कर दुजन से बाहर आ जावे। बाहर आने से पहले डीलर के सहायक को धन्यवाद कहना न भूले, क्योकि ये ही वो व्यक्ति हे जो आपकी सेल्स काल को अच्छा या खराब कर सकता है। अतः हमे उस सहायक को पूरा सम्मान देना चाहिए।

अब हम अगर हम अपना टारगेट प्राप्त करने मे सफल हुये तौ अगली दुकान पर हमे वही सभी सेल्स टेक्निक को अपनाना चाहिए, और अगर हमे पूर्ण सफलता नहीं मिली तौ हमे अगली दुकान पर अपनी काल मे सुधार लाना चाहिए।

यदि आप ये सब करते हैं तो आप एक विक्रेता नहीं रह जाते हैं, बल्कि आप सुपर सेल्सपर्सनबन जाते हैं। और इसमे कोई शक नहीं कि ये सब करके आप अपनी बिक्री दस गुना तक बढ़ा सकते हे।

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